कर्नाटक में सत्ता की जंग

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पटना। साल 2017 का अंत बीजेपी ने गुजरात में अपनी सत्ता को बमुश्किल बचाकर किया और अब वो 19 राज्यों में शासन कर रही है। बीजेपी का अगला निशाना कर्नाटक को कांग्रेस मुक्त बनाने का होगा इसमें किसी तरह की कोई दोराय नहीं है और साल का पहला महासंग्राम का युद्धक्षेत्र कर्नाटक ही है।
गुजरात चुनाव में उम्मीद और घोषणा से कम सीटें आने के कारण एक धारणा यह भी बनी है कि बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आई है इसलिए इस चुनाव को जीतने के लिए पार्टी ताबड़तोड़ मेहनत लगा देगी। बीजेपी यहां अगर कांग्रेस मुक्त’ राज्य बना पाई तो 2019 के दृष्टिकोण से काफी मजबूत हो जाएगी और साथ ही उसका कांग्रेस मुक्त भारत’ का सपना लगभग पूरा हो जाएगा। यदि कांग्रेस कर्नाटक’ हारती है तो नए नवेले अध्यक्ष महोदय सवालों के घेरे में होंगे। लेकिन कांग्रेस को अपनी साख बचानी है और 2019 में विपक्ष को थोड़ा भी टक्कर देना है तो यहां हर कीमत पर उसे सत्ता अपने हाथ’ मे बरकरार रखनी होगी। 224 विधानसभा सीटों पर अपनी चुनौती पेश करते हुए बीजेपी ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है और इसकी शुरुआत हुई हर जीत के केंद्र बिंदु और बीजेपी के तुरुप के इक्का’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्नाटक में रैली से..इस बात में भी कोई शक नहीं कि सभी चुनाव की भांति यहां भी आदरणीय ही मुख्य भूमिका में होंगे और अपनी लोकप्रियता का प्रयोग करेंगे।

यों तो देश को विकास के मुद्दे पर बहस करने की जरूरत है और हर चुनावी रैली यहीं से शुरू भी होती है लेकिन जैसे जैसे चुनावी पारा चढ़ता है बहस विकास को छोड़कर हर मुद्दे पर होती हैयहां तक कि आदरणीय भी मुद्दों से भटक जाते हैं। बहरहाल कांग्रेस किस रणनीति से अपनी सत्ता बचाने उतरेगी ये तो वक़्त बताएगा लेकिन विकासको लेकर प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में चुनावी अभियान शुरू कर दिया है और इसमें कोई शक नहीं कि सभी चुनावों की तरह मोदी ही इस चुनाव के केंद्र में होंगे और केंद्र सरकार की नीतियां डिफेंड करते नज़र आएंगे।
रौशन वर्मा “रौशन”