रोहिंग्या संकट के बाद म्यांमार सीमा पर सुरक्षा कड़ी

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इंफाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने शनिवार को कहा कि म्यांमार में फैली हिंसा के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों के विस्थापित होकर यहां आ जाने की आशंका के मद्देनजर मणिपुर-म्यांमार के 364 किलोमीटर लंबे सीमाक्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इससे पहले म्यांमार से कु छ मुस्लिम अवैध रूप से भारत आ गए थे, जिसके बाद से वे यहां की जेल में बंद हैं।
बिरेन ने कहा, म्यांमार से सटा अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र कई जगहों पर खुला हुआ है और मणिपुर आने के सभी प्रयासों को विफल करने के सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
तेंगनुपाल के पुलिस अधीक्षक एस. इबोमछा ने कहा कि म्यांमार से लगी सीमा पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की ओर से गश्त लगाया जा रहा है। अभी तक हालांकि किसी भी रोहिंग्या की इस ओर आने की खबर नहीं है।
इसबीच एक सामाजिक संगठन मैत्री यूथ संगठन(एमएनएफ) ने मुस्लिमों की ओर से मणिपुर में जेलों में बंद रोहिंग्या मुस्लिमों की रिहाई की मांग पर सवाल उठाया है।
संगठन ने कहा कि यह गौर करने वाली बात है कि मुस्लिम संगठनों ने रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए शरणार्थी का दर्जा मांगा है। म्यांमार के मुस्लिम और मणिपुर के मुस्लिम अलग हैं।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने शनिवार को कहा है कि म्यांमार में मौजूदा हिंसा की वजह से 290,000 रोहिंग्या मुस्लिम भागकर बांग्लादेश आए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक हिंसा में अबतक 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।