प्लास्टिक को ना कह इंदौर की पंचायत ने पाया खिताब

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इंदौर : देश में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नगरी इंदौर की पहचान स्वच्छ शहर के तौर पर बन चुकी है। अब इस शहर के खाते में एक और खिताब आया है। यह खिताब प्लास्टिक मुक्त पंचायत का है। सिंदोड़ा पंचायत के लोगों ने प्लास्टिक के नुकसान को जाना और प्लास्टिक को ना कहा। इसके चलते यह राज्य की पहली प्लास्टिक मुक्त पंचायत बनी है, जिसे दिल्ली में सम्मानित किया गया।

इंदौर को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कृत किया गया है। यह अवार्ड नई दिल्ली में रविवार को फिल्म अभिनेता आमिर खान ने प्रदान किया। इंदौर जिला पंचायत की सीईओ नेहा मीणा ने यह अवार्ड प्राप्त किया।

सिंदोड़ा के प्लास्टिक मुक्त होने पर राज्य के मुख्यमत्री कमलनाथ ने भी बधाई दी है। उन्होंने कहा, जल शक्ति मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट अवार्ड 2020 के लिए देश के चार अग्रणी जिलों में प्रदेश के इंदौर शहर का नाम शामिल। प्रदेश के लिए यह गौरव का क्षण है। इंदौर जिला प्रशासन की पूरी टीम को बधाई।

इंदौर प्रशासन ने जिले की 100 ग्राम पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का महात्मा गांधी जयंती पर संकल्प लिया गया था। प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में ग्रामीणों को बताया गया कि प्लास्टिक मानव और पशुधन के लिए हानिकारक है। इससे अनेक असाध्य बीमारियां होती हैं। प्लास्टिक वर्षो तक नष्ट नहीं होता। यह संदेश सिंदोड़ा के लोगों के दिल और दिमाग पर छा गया। उसके बाद सिंदोड़ा के लोगों ने प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान चलाया और महज 70 दिनों में ही अपने को प्लास्टिक मुक्त कर दिया। लगभग 425 घरों वाली सिंदोड़ा पंचायत सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त हो गई है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि गांव की महिलाओं, सामाजिक संगठन की महिलाओं, महिला सरपंच से लेकर जिले की जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मिलकर काम किया। इसके लिए अभियान भी चलाया गया। घर की एक-एक प्लास्टिक की वस्तु की सूची बनाई गई और उन्हें अलग करने का अभियान चलाया गया। सभी घरों को नीले रंग में रंगकर प्लास्टिक मुक्त घर का नारा दिया गया। आगे चलकर गांव को ब्लू विलेज नाम दिया गया।

यहां के ग्रामीण अब गांव में किसी भी रूप में सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग नहीं कर रहे हैं। गांव में प्लास्टिक की थैली का उपयोग नहीं किया जा रहा है। यहां के लोग कपड़े की थैली का उपयोग करते हैं। गांव में ग्रामीणों को धरोहर राशि जमा कर कपड़े की थैली भी उपयोग के लिए दी जा रही है। उपयोग के पश्चात थैली जमा करने पर उन्हें धरोहर राशि वापस कर दी जाती है।

एक तरफ जहां प्लास्टिक थैली का उपयोग बंद किया गया, वहीं गांव में शादी-ब्याह, जन्मदिन या अन्य किसी समारोह में भी सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग नहीं हो रहा है। ग्रामीणों को एक रुपये किराये पर एक बर्तन का सेट दिया जा रहा है। गांव में प्लास्टिक के उपयोग पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

जिलाधिकारी लोकेश कुमार जाटव ने बताया, गांव को प्लास्टिक मुक्त घोषित करने से पहले सिंदोड़ा गांव में तीन स्तरों पर जांच दल ने निरीक्षण किया था। इसके बाद इसे प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया। जिला पंचायत की सीईओ नेहा मीणा ने कहा, यह अभियान पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित किया गया। अब सिंदोड़ा को मॉडल बनाकर हर जनपद पंचायत में 20-20 पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाया जाएगा।

गांव की सरपंच आशा नरेंद्र पाटीदार ने बताया कि गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं ली गई है। ज्ञात हो कि इंदौर बीते तीन सालों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता आ रहा है। चौथी बार की दो तिमाही में भी इंदौर देश में अव्वल बना हुआ है। अब इस शहर की एक पंचायत भी प्लास्टिक मुक्त बन गई है।

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