कश्मीर में नेताओं को रिहा करें : कर्ण सिंह

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नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू एवं कश्मीर के अंतिम युवराज डॉ. कर्ण सिंह ने गुरुवार को राज्य में गिरफ्तार किए गए राजनीतिक नेताओं की रिहाई की मांग की। सिंह ने एक बयान में कहा कि कोशिश यह होनी चाहिए कि जम्मू एवं कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्यत्व प्राप्त हो, ताकि यहां के लोग कम से कम देश के बाकी हिस्सों में उपलब्ध राजनीतिक अधिकारों को प्राप्त कर सकें।

इसी के साथ सिंह ने केंद्र द्वारा किए गए राज्य के पुनर्गठन और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले का स्वागत भी किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के पुनर्गठन में सकारात्मकता भी है।

सिंह ने एक बयान में कहा, मेरा पूरा जीवन जम्मू एवं कश्मीर के साथ जुड़ा हुआ है। यह मेरे पूर्वजों द्वारा स्थापित राज्य है, जिसके लिए मेरे पिता महाराजा हरि सिंह ने 1947 में इंस्ट्रमेंट ऑफ एक्सेसेशन पर हस्ताक्षर किए थे। मेरी एकमात्र चिंता राज्य के सभी वर्गों व क्षेत्रों के कल्याण के लिए है।

कर्ण सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को रद्द करने से पहले दो क्षेत्रीय दलों को दरकिनार करते हुए फैसला लेने पर केंद्र की आलोचना भी की। इस दौरान हालांकि उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का नाम नहीं लिया।

उन्होंने कहा, दो मुख्य क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रविरोधी कहकर खारिज करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने भारत के लिए वर्षों से बड़ा बलिदान दिया है। इसके अलावा दोनों दल केंद्र और राज्य में समय-समय पर राष्ट्रीय दलों और सरकारों के सहयोगी रहे हैं।

उन्होंने कहा, मैं आग्रह करता हूं कि कश्मीर में वैध राजनीतिक दलों के नेताओं को जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए। इसी के साथ व्यापक रूप से बदली स्थिति के मद्देनजर उन दलों व समाज के नागरिकों के साथ व्यापक राजनीतिक संवाद शुरू किया जाना चाहिए।

कर्ण सिंह ने कहा, हमें हर कीमत पर सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखते हुए हिंसा से बचना चाहिए। सिंह ने कहा, व्यक्तिगत रूप से मैं इन बदलावों की निंदा करने से सहमत नहीं हूं। इसमें कई सकारात्मक बिंदु हैं।

उन्होंने कहा, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का स्वागत किया जाना है। सिंह ने कहा, मैं जब 1965 में जम्मू-कश्मीर का सदर-ए-रियासत था तो मैंने भी ऐसी ही सलाह दी थी। उस समय मैंने सार्वजनिक रूप से राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव पेश करने का सुझाव दिया था।