आरकॉम ने कर मामले पर फ्रांसीसी मीडिया की रपट खारिज की

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नई दिल्ली : रिलायंस कम्युनिकेशन ने शनिवार को उस मीडिया रपट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के कुछ माह बाद ही फ्रांस स्थित अनिल अंबानी की कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो के कर को फ्रांस सरकार ने माफ कर दिया था।

यहां जारी एक बयान के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशन ने स्पष्ट किया कि इसकी अनुषांगिक रिलायंस एफएलएजी(फ्लैग) अटलांटिक फ्रांस एसएएस का कर मामला वर्ष 2018 का है और इसे स्थानीय कानून के हिसाब से सुलझा लिया गया है। यह प्रक्रिया भारत सरकार के फ्रांसीसी कंपनी दसॉ से लड़ाकू जेट विमान खरीदने के निर्णय की घोषणा से बहुत पहले समाप्त हो चुकी थी।

कंपनी ने कहा, रिलायंस फ्लैग कर मामला 2008 का है, जो करीब 10 वर्ष पुराना मामला है।

बयान के अनुसार, रिलायंस फ्लैग का कहना है कि कर मांग पूरी तरह से अनिश्चित और अवैध थी।

बयान में कहा गया है कि रिलायंस फ्लैग ने फ्रांस में मौजूद सभी कंपनियों के लिए उपलब्ध कानूनी संरचना के अधीन अपने कर विवाद को सुलझा लिए थे।

कंपनी ने कहा है, फ्रांसीसी कर अधिकारियों द्वारा विचाराधीन अवधि 2008-12 के दौरान, फ्लैग फ्रांस को करीब 20 करोड़ रुपये की संचालन क्षति हुई थी।

बयान के अनुसार, फ्रांस के कर अधिकारियों ने उसी अवधि के दौरान 1,100 करोड़ रुपये कर की मांग की। फ्रांस के कर कानून के हिसाब से, अंतिम समझौते के तौर पर, आपसी समझौते के अंतर्गत 56 करोड़ रुपये देने पर हस्ताक्षर किए गए।

फ्लैग फ्रांस के पास फ्रांस में दूरसंचार संरचना और एक केबल नेटवर्क का स्वामित्व है।