तकनीकी शिक्षा के साथ शारीरिक व योग प्रशिक्षण जरूरी : वेंकैया नायडू

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इंदौर : यहां के श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में गुरुवार को उपराष्ट्रपति एम़ वेंकैया नायडू ने तकनीकी शिक्षा के साथ शारीरिक और योग प्रशिक्षण को भी जरूरी बताया। साथ ही फास्ट फूड से दूर रहने की सलाह दी।

नायडू ने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, देश के शैक्षणिक संस्थान बौद्धिक विकास के साथ विद्याíथयों के शारीरिक विकास पर भी जोर दें, यानी उन्हें तकनीकी शिक्षा के साथ शारीरिक शिक्षा और योग की शिक्षा भी दी जाए। शिक्षा से मनुष्य सभ्य, सुसंस्कृत और संस्कारित होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सिर्फ ज्ञानार्जन ही नहीं, बल्कि शिक्षा प्राप्त करके विद्यार्थी राष्ट्र की सेवा करें। शिक्षा का उद्देश्य परिवार, समाज और देश की सेवा करना है। शिक्षा से मनुष्य देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनता है। विद्याíथयों को शिक्षा के साथ नौकरी या स्वरोजगार भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था। नालंदा और तक्षशिला विश्व स्तर के विद्यालय थे, जहां पर दस हजार से अािक विद्यार्थी पढ़ते थे। प्राचीन भारत में सुश्रुत, धनवन्तरि, भास्कराचार्य और वाराहमिहिर जैसे मूर्धन्य विद्वान हुए हैं। आचार्य सुश्रुत ने दुनिया को पहली बार सामान्य सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी की प्रक्रिया बताई। मध्य युग में हमारा देश मुगलों और अग्रेंजों का गुलाम हो गया और उन्होंने इस देश को लूटा और धोखा दिया, जिसके कारण हम पिछड़ गए।

नायडू ने कहा, अब हम उदारीकरण, निजीकरण, स्टैंडअप और स्टार्टअप के जरिए भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं। भारत में इंदिरा नुई और सुंदर पिचाई जैसे असाधारण प्रबंधक हैं।

उन्होंने योग को दुनिया में स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को विश्वयोग दिवस घोषित किया है। गत 21 जून को विश्व के 176 देशों द्वारा एक साथ योगाभ्यास किया गया। चिली और ग्वाटेमाला में योग को अनिवार्य शिक्षा घोषित किया गया है। योग कोई राजनैतिक या धाíमक कार्यक्रम नहीं है। योग से शरीर और मन स्वस्थ रहता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, इंदौर न केवल स्वच्छता एवं खानपान में नंबर वन है, बल्कि शिक्षा और समाजसेवा में भी नंबर वन है। यहां की अच्छाइयां पूरी दुनिया में फैलाने की जरूरत है। आजकल फास्ट फूड का जमाना है। फास्ट फूड से नई-नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। हमें पिज्जा बर्गर की बजाय, पारंपरिक भारतीय भोजन इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

नायडू ने दसवीं तक की शिक्षा बच्चों को मातृभाषा में दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि विवेक जागृत करना है। आज की युवा पीढ़ी भारत का भविष्य है, उसे कानून और नियम का पालन करने की आदत होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो भारत में पैदा हुए हैं, वे सब भारतीय हैं। स्त्री, पुरुष, जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटा नहीं जा सकता। हमारे सामने देश में निरक्षरता और गरीबी बड़ी चुनौती है। व्यक्ति से बड़ा परिवार, परिवार से बड़ा समाज और समाज से बड़ा देश होता है। हमें राष्ट्रीय एकता मजबूत करने के लिए जातिवाद, संप्रदायवाद, धन लोलुपता और अपराध को समाप्त करना होगा।

प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने इस मौके पर कहा कि भारत का इतिहास गौरवमयी रहा है। भारत विश्वगुरु रहा है और शीघ्र ही फिर विश्वगुरु बनेगा।

इस अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट, उच्च शिक्षा और खेल युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी, वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति पुरुषोत्तम दास पसारी ने अपने विचार व्यक्त किए।