विधानसभा अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के लिए मास्क के साथ-साथ दो गज दूरी… नहीं है जरूरी!

राजनीति
इंद्र वशिष्ठ : क्या मास्क और दो गज दूरी विधानसभा अध्यक्ष के लिए नहीं है जरूरी? मास्क और दो गज दूरी के नियमों की दिल्ली विधानसभा मेंं जमकर धज्जियां उडाई गई। जिस सदन को लोकतंत्र का मंंदिर कहा जाता है और जहां बैठ कर नियम कानून बनाए जाते है उस सदन मेंं ही नियमों की धज्जियां उडा़ना शर्मनाक है। यह सब दिल्ली विधानसभा सभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल की मौजूदगी मेंं हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने खुद भी नियमों का पालन नहीं किया। क्या मास्क और दो गज दूरी विधानसभा अध्यक्ष के लिए नहीं है जरूरी।
17 अक्टूबर को दिल्ली विधानसभा के कमेटी हाल में महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्री अग्रसेन धाम, कुंडली (अग्रकेसरी महाकुटुम्ब अंतरराष्ट्रीय ट्रस्ट) ने किया था । दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष  राम निवास गोयल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।  संस्था के मार्गदर्शक और विधायक महेंद्र गोयल, शिव चरण गोयल, राजेश गुप्ता भी मौजूद थे।
सदन में कानून को ठेंगा दिखाया-
इस कार्यक्रम की तस्वीरों से साफ है कि विधानसभा कमेटी हाल में तो नियमों का उल्लंघन किया ही गया। विधानसभा के सदन यानी वह सभागार जहां बैठ कर विधायक कानून बनाते है वहां भी संस्था के लोगों ने नियम कानून का पालन नहीं किया। यह वही सदन है जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा चलाया जाता है। जिसकी व्यवस्था या गरिमा/ पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष और विधायकों की होती है। इस सदन में आम लोगों के द्वारा नियमों को तोड़ने से समाज में बहुत ही गलत संदेश जाता है। इससे विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है। विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति के बिना वहां कुछ भी नहीं किया जा सकता है।
जान से खिलवाड़ एफआईआर दर्ज करो –
दिल्ली में सिनेमा घरों को पचास फीसदी क्षमता के साथ खोलने का नियम लागू किया गया है। अंतिम संस्कार में 20  और शादी में 50 की सीमित संख्या में लोगों को शामिल होने की इजाज़त दी जाती है। दिल्ली विधानसभा सभा में आयोजित कार्यक्रम मेंं कमेटी हाल लोगों से खचाखच भरा था। यह न सिर्फ़ नियमों का उल्लंघन है बल्कि कोरोना को फैलने देने का न्योता देना है।
इस तरह से लोगों की जान से खिलवाड़ करने का यह मामला महामारी कानून और आपदा प्रबंधन कानून के तहत अपराध भी है। पुलिस अफसरों को आयोजकों के खिलाफ उसी तरह एफआईआर दर्ज की करनी चाहिए जैसी निजामुद्दीन मरकज के मामले में तब्लीगी जमात के मौलाना साद के खिलाफ की गई।
सिर्फ़ भारत में यह होता है-
कितनी अजीब बात है कि ऐसा सिर्फ़ भारत में ही होता कि कानून बनाने वाले विधायक, सासंद, मंत्री, कानून लागू करने वाले आईपीएस अफसर और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक खुद नियमों का पालन नहीं करते हैं। ये सब जनता को नियम पालन करने का उपदेश देते है। नियमों का पालन न करने पर आम जनता पर जुर्माना लगाया जाता है और एफआईआर तक दर्ज की जाती है।
लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे उपरोक्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
यह सुविधा सबको मिले-
अग्रवाल समाज के कार्यक्रम का आयोजन विधानसभा परिसर मेंं किए जाने से क्या यह माना जाए कि अब किसी भी समाज या वर्ग के लोगों की संस्था वहां अपने कार्यक्रम आयोजित कर सकती है या यह  सुविधा विधानसभा अध्यक्ष और विधायकों ने सिर्फ़ अपने समाज के लिए उपलब्ध कराई थी। विधानसभा अध्यक्ष और दिल्ली सरकार को इस बारे मेंं लोगों को जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी संस्थाए इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
मनीष सिसौदिया ने नियम तोड़े-
दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया जो खुद को पत्रकार भी बताते है उनके लिए भी नियम/ कानून का सम्मान/ पालन करना जरुरी नहीं लगता है। कोरोना के शिकार हो जाने के बावजूद वह मास्क और दो गज दूरी के नियमों का पालन नहीं करते हैं। मुंडका में खेल विश्वविद्यालय स्थल के मुआयने के दौरान नियमों का उल्लंघन किया।
मोदी जी खुद भी कार्रवाई करके दिखाओ-
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि एक देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ मास्क न पहनने पर जुर्माना लगाया गया है। प्रधानमंत्री दूसरे देशों द्वारा नियमों का पालन बिना भेदभाव के सख्ती से किए जाने का उदाहरण तो देते हैं। लेकिन नियमों का उल्लघंन करने वाले उपरोक्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की खुद हिम्मत नहीं दिखाते हैं।
कानून का पाठ पढ़ाओ-
प्रधानमंत्री जी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद बोबडे, रामदेव, बालकृष्ण, डाक्टर बलबीर सिंह तोमर आदि डाक्टरों और अपने मातहतों गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी, सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करके दिखाओ।
इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर सच्चिदानंद श्रीवास्तव और आईपीएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करके दिखाओ। क्योंकि नियम लागू कराने वाला  ख़ुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाए तो समाज में ग़लत संदेश जाता है। पुलिस कमिश्नर का नियम तोड़ना ज्यादा गंभीर मामला है।
भारत में है किसी में इतना दम ?
उल्लेखनीय है कि बिना मास्क के सार्वजनिक स्थान पर जाने के कारण बुल्गेरिया के प्रधानमंत्री बॉयको बोरिसोव, उनके काफिले के अफसरों और पत्रकारों पर 170 डॉलर यानी 13 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। रोमानिया के प्रधानमंत्री पर भी मास्क न पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर 600 डॉलर यानी 45 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया।
दरबारी अफसर-
भारत में सिर्फ बातें बड़ी बड़ी करने का रिवाज हैं। इस तरह की कार्रवाई करने का दम अफसरों में नहीं है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ज्यादातर अफसर महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती के लिए राजनेताओं के दरबारी बन जाते हैं।