‘मोदी ने उद्योगपतियों का 5.5 लाख करोड़ का कर्ज माफ किया’

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रांची (आईएएनएस)| कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में उद्योगपतियों का 5.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया, लेकिन किसानों, युवाओं और व्यापारियों के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। राहुल गांधी झारखंड के सिमडेगा जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ” (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी ने किसानों, युवाओं और व्यापारियों के लिए काम नहीं किया है, बल्कि उन्होंने पिछले पांच साल में सिर्फ 15 लोगों के लिए काम किया है। उन्होंने इन लोगों का 5.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है।”

चुनावी गठबंधन की घोषणा के बाद प्रदेश में पहली बार महागठबंधन के प्रमुख नेताओं ने मंच साझा किया। मंच पर मौजूद नेताओं में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी शामिल थे।

राहुल गांधी ने कहा, “मोदी सरकार ने मनरेगा की 35,000 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग नीरव मोदी के लिए किया। उन्होंने भोजन के अधिकार की राशि घटा दी। मोदी ने दो करोड़ लोगों को नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन रोजगार का सृजन नहीं हो पाया।”

गांधी ने कहा, “नोटबंदी के बाद गब्बर सिंह टैक्स लगाया गया। गरीबों से पैसे लेकर 15 लोगों को बांट दिए गए। 30,000 करोड़ रुपये अनिल अंबानी और 35,000 करोड़ रुपये मेहुल चोकसी को दे दिए गए।”

उन्होंने कहा, “अगर नरेंद्र मोदी झूठ बोल सकते हैं तो कांग्रेस सच क्यों नहीं बोल सकती है।”

उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने लुटेरों को पैसे बांटे, लेकिन कांग्रेस ने न्याय योजना के तहत 25 करोड़ लोगों को सालाना 72,000 करोड़ रुपये देने का फैसला लिया है। न्याय योजना के लिए धन की व्यवस्था देश के लुटेरों से पैसे वसूल करके किया जाएगा।”

गांधी ने कहा, “इससे क्रय-शक्ति में सुधार होगा और उससे बाजार को लाभ मिलेगा। अगर बाजार समृद्ध होगा तो कारखाने लगेंगे और इससे रोजगार का सृजन होगा।”

उन्होंने कहा, “कांग्रेस और इसके सहयोगी जनजातियों, गरीबों और समाज के अन्य वर्ग के लोगों की रक्षा करने के लिए समर्पित हैं। केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी तभी पेसा-कानून, भूमि अधिग्रहण कानून और जनजाति विधेयक लाए गए।”

उन्होंने कहा, “हम जनजातियों और गरीबों के जल, जंगल की रक्षा करेंगे। मोदी गरीबों के पैसे का इस्तेमाल दूसरे काम में करके भी संतुष्ट नहीं है, इसलिए अब वह जनजातियों और गरीबों की जमीन हड़पना चाहते हैं।”