अगर केंद्र ने नागरिकता विधेयक को कानून बनाया तो पूर्वोत्तर एकजुट होकर लड़ेगा : जोरामथांगा

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आईजोल : मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने गुरुवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार भविष्य में नागरिकता (संशोधन) विधेयक (सीएबी) को कानून के रूप में लाएगी, तो पूर्वोत्तर की सभी राजनीतिक पार्टियां, एनजीओ और नागरिक समाज के सदस्य इसके खिलाफ एकजुट होकर लडें़गे।

मुख्यमंत्री ने आईजोल में एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, अगर केंद्र सरकार भविष्य में सीएबी को फिर से कानून के रूप में लाती है, तो पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी राजनीतिक दल, एनजीओ और नागरिक समाज के सदस्य ऐसे प्रयासों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे।

मुख्यमंत्री व सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फंट्र (एमएनएफ) के अध्यक्ष जोरामथांगा ने संसद में सीएबी को फिर से लाने की स्थिति में लोगों, एनजीओ, गिरजाघरों और राजनीतिक दलों से हाथ मिलाने और एकजुट होकर खड़े होने को कहा।

उन्होंने कहा, पूर्वोत्तर भारत के लोगों और सभी संगठनों के एकजुट विरोध प्रदर्शनों के कारण राज्यसभा में सीएबी पारित नहीं हो सका।

शक्तिशाली मिजोरम एनजीओ कोऑर्डिनेशन कमेटी (एमएनसीसी) ने विधेयक के खिलाफ गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार करने समेत कई आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किए। एमएनएफ और यंग मिजो एसोसिएशन (वायएमए) इन आंदोलनों का हिस्सा थे।

त्रिपुरा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ नवगठित आंदोलन (एमएसीएबी) सोमवार को अगरतला में एक विजय रैली का आयोजन करेगा।

एमसीएबी के संयोजक श्रीदम देववर्मा ने आईएएनएस को बताया कि हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार राज्यसभा में विधेयक को पारित कराने में नाकाम रही लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों में अगर वह फिर से सत्ता में आ जाती है, तो इसे पारित कराने का प्रयास कर सकती है।

उन्होंने कहा, हमें एकजुट होकर आगामी चुनाव में इसे रोक देना चाहिए। प्रमुख राजनीतिक दल, एनजीओ और नागरिक समाज के समूह इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर यह कानून बन जाता है, तो इसका जातीय समुदायों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

8 जनवरी को कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध के बीच लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया गया था। यह विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है।

यह विवादास्पद विधेयक तीन जून को खत्म हो जाएगा, जब 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा क्योंकि यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका जो कि बुधवार को यानि बजट सत्र के आखिरी दिन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई थी।