अगर राजनीति में यह सभी समीकरण एक साथ होती है तो हो जाएगी नीतीश कुमार की बिहार से छुट्टी

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BIHAR : बिहार में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में भले ही अभी देरी है, लेकिन राज्यसभा की छह और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए अभी से ही सियासी गोटियां सेट करने का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा और विधान परिषद जाने वाले दावेदार पटना से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं।
इन सब के बीच सभी एक सवाल पूछ रहे है कि दिल्ली में नीतीश कुमार का नया पता, क्यों? दरअसल, एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट की माने तो दिल्ली में नीतीश को नया बंगला अलॉट होने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि नीतीश कुमार पटना से दिल्ली शिफ्ट हो सकते है।
अखबार ने लिखा है कि ‘अप्रैल में बिहार से राज्य सभा की कई सीटें खाली हो रही हैं और काफी संभावना है कि नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी दोनों ही राज्य सभा का चुनाव लड़ें।’ ऐसे में जब दिल्ली के लुटिएंस में नीतीश कुमार के नाम बंगला अलॉट हो गया तो अब हर कोई यही पूछ रहा है कि क्या नीतीश दिल्ली शिफ्ट होंगे?
हालांकि जेडीयू का कहना है कि नीतीश कुमार कही नहीं जा रहे है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली के प्रभारी संजय झा की माने तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2025 तक राज्य की राजनीति में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की अगुवाई करेंगे। संजय झा ने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव जो 2020 में सम्भावित है में उनके नेतृत्व में गठबंधन लड़ेगी।
दरअसल केंद्र सरकार ने दिल्ली में नीतीश कुमार को उनके आग्रह पर एक बंगले का आवंटन किया है। शहरी विकास मंत्रालय की ओर से बिहार के सीएम नीतीश कुमार को दिल्‍ली 6 कामराज मार्ग में नया आवास दे दिया है। इसी के साथ उन्‍हें Z+ सुरक्षा भी दे दी गई है। इन सब के बीच अगर नीतीश के राज्यसभा चुनाव लड़ने की बात अगर बात तय हो चुकी है फिर तो ये भी तय है कि बिहार से नीतीश की विदाई 100 फीसदी पक्की है, बस तारीफ का इंतजार है।
2 अप्रैल 2018 तक जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, उनमें दो केंद्रीय मंत्री भी हैं- धर्मेंद्र प्रधान और रविशंकर प्रसाद। इनके अलावा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, जदयू के ही महेंद्र प्रसाद और अनिल कुमार सहनी का कार्यकाल भी अप्रैल 2018 में पूरा हो रहा है।
शरद यादव की सीट पर अलग चुनाव प्रक्रिया के चलते इसे सत्तारूढ़ दल की झोली में आना तय है। नियमित चुनाव वाली छह में से दो सीटें निकालने में जेडीयू को किसी की मदद की दरकार नहीं होगी। बीजेपी को दूसरी सीट के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। तीन सीटों पर जीत के समीकरण से 23 ज्यादा। निर्दलीय एवं आरजेडी व कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों के सहारे एनडीए अपने विरोधियों का हिसाब गड़बड़ करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, ऐसा हुआ तो राजग के हिस्से में चौथी सीट भी पक्की हो सकती है।