मैं फुटबाल के बिना नहीं जी सकता : कोलाको (आईएएनएस स्पेशल सीरीज)

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नई दिल्ली: अर्माडो कोलाको 65 वर्ष की उम्र में भी सपने देख रहे हैं। वह अभी भी भारतीय फुटबाल को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देना चाहते हैं और अपने अगले कोचिंग प्रोजेक्ट का इंतजार कर रहे हैं।

कोलाको फिलहाल, गोवा में 12 से 16 वर्ष की उम्र के युवा खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं और यह मानते हैं कि अगर उन्हें मौका मिला तो वह भारतीय की राष्ट्रीय पुरुष फुटबाल टीम के कोच बनना चाहेंगे।

आईएएनएस द्वारा जारी खास सीरीज वेयर आर दे नाव (अभी वे कहां हैं) के अंतर्गत खास बातचीत में कोलाको ने कहा, मैं फुटबाल के बिना नहीं जी सकता। फुटबाल ने मुझे सबकुछ दिया है, मैं अपना अनुभव युवा खिलाड़ियों को प्रदान करना चाहता हूं। मैं निश्चित हूं कि मेरे मार्गदर्शन में फुटबाल सीखने वाले 47 बच्चों में से दो भी अगर देश के लिए खेले तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

कोलको किसी प्रकार की अकादमी नहीं चलाते हैं क्योंकि उसके लिए अधिक सुविधाओं की जरूरत है। वह रविवार और अन्य छुट्टियों के दिन एक व्यक्तिगत अभियान के तौर पर बच्चों को फुटबाल सिखाते हैं।

कोलाको ने कहा, देखिए, अकादमी चलाने के लिए आपको मूलभूत सुविधाएं, एक ट्रेनिंग ग्राउंड और लोग चाहिए जो उसका ख्याल रख सके। मैं उनके रविवार को छुट्टियों के दिन बुलाता हूं। यह सब मैं खुद कर रहा हूं।

उनका आखिरी प्रमुख कार्य गोवा की टीम के साथ था जिसने अखिल भारतीय फुटबाल माहसंघ (एआईएफएफ) द्वारा आयोजित कराए जाने वाले फुटबाल टूर्नामेंट संतोष ट्रॉफी में भाग लिया था।

कोलाको को गोवा के क्लब चर्चिल ब्रदर्स एससी और डेम्पो एससी का सबसे सफल कोच माना जाता है। वह चार लीग खिताब अपने नाम कर चुके हैं जबकि किसी आई-लीग क्लब को एएफसी कप के सेमीफाइनल तक ले जाने वाले पहले कोच हैं।

एक खिलाड़ी के रूप में कोलाको 1970-71 सीजन में डेम्पो से जुड़े थे जहां उन्हें कोच जोसफ रत्नाम ने अनुशासन के साथ फुटबाल खेलना सिखाया। वह अगले 14 वर्षो तक डेम्पो के लिए खेले और 1985 में संन्यास ले लिया।

कोलाको 1994 से 2015 तक बड़ी टीमों के कोच रहे। उन्होंने उन्होंने चर्चिल ब्रदर्स, डेम्पो और ईस्ट बंगाल का मार्गदर्श किया। डेम्पो के साथ उन्होंने तीन बार आई-लीग खिताब जीता। 2011 सीजन में वह भारत की राष्ट्रीय टीम के कोच बने जिसने 2014 फीफा विश्व कप के क्वालीफायर्स में हिस्सा लिया।

वह मानते हैं कि एफसी बार्देज के साथ उनके करार की समाप्ति के बाद वह एक बड़े प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं।

कोलाको ने कहा, मैं ईस्ट बंगाल के साथ अपने अनुबंध की सामप्ती के बाद गोवा आया और एफसी बार्देज को कोच बना। मई 2019 तक बार्देज के साथ भी मेरे करार का अंत हो जाएगा इसलिए शायद मैं किसी क्लब का कोच बन सकता हूं।

(यह साक्षात्कार आईएएनएस की विशेष सीरीज वेयर आर दे नाउ (अभी वे कहां हैं) का हिस्सा है।)