'मुट्ठी भर छात्र' गलत सूचनाएं फैलाने का अभियान चला रहे : जेएनयू

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नई दिल्ली| जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा भ्रष्टाचार सहित विभिन्न आरोपों पर विश्वविद्यालय ने कहा है कि ‘मुट्ठी भर छात्रों’ द्वारा ‘गलत सूचनाओं के प्रसार के लिए अभियान’ चलाया जा रहा है। जेएनयू प्रशासन ने मंगलवार शाम छात्र समुदाय को संबोधित एक विज्ञप्ति में छात्रों की शिकायतों को निराधार साबित करने के प्रयास के तहत कई कारण गिनाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष मोहित पांडे के वर्तमान सेमेस्टर में नामांकन करने से इनकार करने के खिलाफ जेएनयूएसयू ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक खंड में मंगलवार को विरोध स्वरूप एक बैठक का आयोजन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मोहित पांडे द्वारा 10,000-20,000 रुपये का जुर्माना जमा नहीं किया था, इसलिए उनका नामांकन नहीं किया गया।
जेएनयूएसयू ने बैठक के दौरान प्रशासन द्वारा सीटों में कटौती किए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह कुछ समय बाद प्रशासन के भ्रष्टाचार को उजागर करेगा।
वहीं, दूसरी तरह अपनी सफाई में विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि प्रोक्टोरियल जांच समिति की सिफारिश के बाद लगाई गई जुर्माने की राशि को पांडे ने भुगतान करने से इनकार कर दिया और वे अन्य अधिकारियों की तरह ही अपनी बकाया राशि का भुगतान कर सकते थे, और ऐसा न करने पर सजा वह सजा के हकदार हैं।
इसके लिए प्रशासन ने एक दूसरे आंदोलनरत छात्र दिलीप यादव का उदाहरण दिया, जिनका भी नामांकन नहीं किया गया है।
विवि प्रशासन ने कहा कि यादव को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जुर्माने को जमा करने का आदेश दिया गया था। दरअसल, दिलीप यादव ने प्रॉक्टोरियल जांच समिति द्वारा उनके खिलाफ दण्डात्मक उपाय संबंधी कदम उठाए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोशल मीडिया में फैलाए जा रहे गलत सूचनाओं के अभियान का खंडन करते हुए कहा कि लापता छात्र नजीब अहमद के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों को दण्डित नहीं किया गया है। जैसा कि उनके द्वारा प्रशासन द्वारा इस मामले में लापरवाही बरते जाने का दावा किया गया।