जेट के स्लॉट पुनर्आवंटन से हिस्सेदारी बिक्री पर असर को लेकर विशेषज्ञ बंटे

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नई दिल्ली : विमानन विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर अलग-अलग है कि क्या सरकार को फिलहाल बंद हुई जेट एयरवेज के स्लॉट का पुनर्आवंटन अस्थायी रूप से प्रतिद्वंद्वी घरेलू विमानन कंपनियों को करना चाहिए या नहीं, क्योंकि इससे कंपनी की हिस्सेदारी बिक्री पर असर पड़ने की संभावना है।

सरकार का जहां कहना है कि अन्य एयरलाइनों को दिए गए स्लॉट एक महीने की नोटिस पर वापस लिए जा सकते है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि वापस लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि एयरलाइंस इन उड़ानों के टिकट 3-6 महीने पहले ही बेच चुकी होंगी।

उद्योग के एक सूत्र ने बताया, स्लॉट लौटाने के लिए कहने पर ये एयरलाइन्स बड़ी संख्या में यात्रियों की बुकिंग का हवाला दे सकती हैं। इससे स्लॉट लौटाने में निश्चित रूप से देरी होगी।

एचडीएफसी सिक्युरिटीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख (रिटेल रिसर्च) दीपक जासानी को हालांकि स्लॉट के अस्थायी आधार पर पुनर्आवंटन में कोई समस्या नहीं दिखती है।

जासानी ने आईएएनएस को बताया, जेट एयरवेज के निवेशकों और संभावित खरीदारों को इसकी जानकारी होगी और वे पूरी पड़ताल के बाद ही तय करेंगे कि आगे क्या करना है।

वहीं, उद्योग के एक अन्य विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, यह सही नहीं होगा। अगर दिल्ली और मुंबई जैसे सबसे व्यस्त हवाईअड्डों के स्लॉट जेट एयरवेज से लेकर अन्य एयरलाइन्स को दे दिए जाएंगे तो इससे निवेशक निश्चित रूप से हतोत्साहित होंगे।

इस दौरान, दो निजी विमानन कंपनियों को अतिरिक्त स्लॉट दिए गए हैं, जिनका कहना है कि वे इस मार्ग पर जुलाई अंत तक बुकिंग कर रही हैं।

विमानन नियामक नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) ने जेट एयरवेज का परिचालन रुकने से खाली हुए स्लॉट को अन्य एयरलाइन्स को दे दिया है, ताकि उड़ानें प्रभावित न हों। नहीं तो मांग और आपूर्ति में अंतर आने के कारण हवाई किराए आसमान छूने लगेंगे।