आरबीआई की कटौती का ग्राहकों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ

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मुंबई : मांग और विकास दर को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बुधवार को रेपो दर में 35 बीपीएस (आधार अंकों) की कटौती की घोषणा की, जिसका लाभ खुदरा कर्ज लेने वाले ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि हाल के अतीत को देखने से पता चलता है कि केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में की गई कटौती का लाभ आखिरी उपभोक्ता तक आनुपातिक तरीके से पहुंचता है।

रेपो दर में 35 बीपीएस की नवीनतम कटौती से पहले एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने फरवरी 2019 के बाद से 75 बीपीएस की कटौती की थी। लेकिन आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास के मुताबिक, बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए महज 29 बीपीएस की कटौती की।

दास ने मौद्रिक समिति की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, फरवरी से जून के दौरान वेटेज एवरेज कॉल मनी रेट (डब्ल्यूएसीआर) में 78 बीपीएस की कमी आई, जबकि मार्केट रेपो रेट में 73 बीपीएस की कमी आई.. लेकिन बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए अब तक महज 29 बीपीएस की ही कटौती।

उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी दोनों के साथ सलाह-मशविरा किया गया है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि वे धीरे-धीरे ब्याज दरों को कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस के एमडी (प्रबंध निदेशक) और सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) उमेश रेवानकर का कहना है, हम आरबीआई द्वारा 35 बीपीएस की कटौती के फैसले का स्वागत करते हैं। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थितियों को देखते हुए यह हमारी उम्मीदों के अनुरूप है। साल 2019 में कुल 110 बीपीएस की कटौती की गई है। हम उम्मीद करते हैं कि बैंक अपने ग्राहकों को इसका लाभ पहुंचाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।