क्यूएस रैंकिंग में चीनी विश्वविद्यालय का प्रदर्शन शानदार

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बीजिंग : 19 जून को क्यूएस (क्वाकक्वारेली सिमोंड्स ) वैश्विक शिक्षा ग्रुप ने लंदन में विश्वभर के विश्वविद्यालयों की नवीन वरीयता क्रम जारी की, जिसमें विश्व के 82 देशों और क्षेत्रों के 1000 विश्वविद्यालय शामिल हैं। चीन का छिंग हुआ विश्वविद्यालय अपनी निरंतर बढ़ रही चौतरफा शक्ति से इस रैकिंग में 16वें स्थान पर रहा, जबकि पेकिंग विश्वविद्यालय पिछले साल के 30वें स्थान पर बढ़कर 22वें स्थान पर आया। चीन के दो सबसे चोटी स्तर वाले विश्वविद्यालयों ने इतिहास में सबसे ऊंचा स्थान हासिल किया।

2020 क्यूएस विश्वविद्याल रैंकिंग में अमेरिका की मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी लगातार 8 साल तक विश्व में पहले स्थान पर रही। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से 11वें स्थान पर रहे, जिनकी रैंकिंग एशियाई विश्वविद्यालयों में सब से ऊंची है। नवीन रैंकिंग में चीनी मुख्य भूमि के विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन शानदार रहा।

छिंग हुआ विश्वविद्यालय विश्व में 16वें स्थान पर रहा, जो अमेरिका के येल विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय से आगे है। पेकिंग विश्वविद्यालय 8 पायदान चढ़कर 22वें स्थान पर आ गया। चीन में कुल 65 विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में नजर आए, जिनमें मुख्यभूमि के 42, थाईवान के 16 और हांगकांग के 7 विश्वविद्यालय शामिल हैं।

क्यूएस वैश्विक शिक्षा ग्रुप के चीनी क्षेत्र के मैनेजर च्यांग श्येन ने बताया कि चीन विज्ञान और अनुसंधान को बड़ा महत्व देता है और इसमें पूंजी निवेश निरंतर बढ़ा रहा है। इस तरह चीन के अनुसंधान की समग्र शक्ति दिन ब दिन बढ़ रही है और अमेरिका और ब्रिटेन के साथ शिक्षा क्षेत्र में फासला निरंतर पाट रहा है।

उन्होंने बताया कि चालू साल नए चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। चीनी शिक्षा की समग्र शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव को बड़ी मजबूती मिली है और शिक्षा के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल हुई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर वाले विज्ञान और अनुसंधान को चीन बड़ा महत्व देता है और इस में पूंजी निवेश निरंतर बढ़ा रहा है, जिससे चीन के वैज्ञानिक अध्ययन में चौंकाने वाली प्रगति हुई और अमेरिका से चीन का फासला निरंतर कम हो रहा है।

नवीन रैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार, चीनी मुख्य भूमि के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों ने पिछले पांच साल में कुल 4 लाख 28 हजार से अधिक अध्ययन पेपर जारी किए। इसके साथ अमेरिका के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों ने 4 लाख 43 हजार अध्ययन पेपर जारी किए। संख्या में अंतर सिर्फ 15 हजार है।

चीनी विश्वविद्यालयों द्वारा अंतराष्ट्रीय छात्रों के आकर्षित होने और वैश्विक अनुसंधान सहयोग चलाने की चर्चा में शांग श्येन ने बताया कि चीन शैक्षिक शक्ति बनने के रास्ते पर स्थिरता से चल रहा है और शिक्षा तथा अग्रिम मोर्चे के विज्ञान और अनुसंधान के मिलाप पर बड़ा ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि बाद में विश्व के शक्तिशाली शिक्षा देश के निर्माण में चीन अवश्य ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर वाले विश्वविद्यालय के प्रबंधन और समीक्षा की व्यवस्था के निर्माण पर ध्यान देगा और वैश्विक अनुसंधान, अध्ययन और उत्पादन के सहयोग और वैज्ञानिक उपलब्धियों के वास्तविक इस्तेमाल को बढ़ावा देगा और विभिन्न विद्याओं के मिश्रित विकास को बढ़ाया जाएगा, ताकि चीन यथाशीघ्र विश्व शिक्षा का शक्तिशाली देश बन सके।

(साभार : चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)