उपचुनाव : भाजपा में एक-एक सीट पर कई दावेदार

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए तिथियों का ऐलान होते ही सियासी तापमान चढ़ने लगा है। इन सीटों के लिए भले ही बसपा ने सभी, कांग्रेस ने ज्यादातर और सपा ने कुछ सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हों, पर भाजपा ने अब तक प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है। प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी में लगातार मंथन का दौर चल रहा है। लेकिन एक-एक सीट पर कई दावेदार अपना दावा ठोक रहे हैं।

उम्मीदवारों के नामों को लेकर पार्टी रणनीतिकारों ने विचार-विमर्श के दो चरण पूरे कर लिए हैं, लेकिन अभी कोई नतीजा नहीं निकला है। उपचुनाव को लेकर अलग-अलग सीटों के प्रभारी बनाए गए मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट संगठन को सौंप दी है। नेतृत्व ने इन रिपोर्टो पर मनन-मंथन का काम भी पूरा कर लिया है। अभी एक-दो दौर बाकी है, जिन पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा की हर एक सीट पर 20 से लेकर 25 दावेदार अपना दावा कर रहे हैं। दिलचस्प तो यह है कि लोकसभा चुनाव में जिन सांसदों का टिकट कट गया था, वह भी विधायक बनने के लिए जोर लगा रहे हैं। बाराबंकी के जैदपुर में 28, लखनऊ के कैंट में 25, टूंडला में 20 दावेदारों ने दावा ठोक रखा है। कहीं-कहीं इनसे भी ज्यादा लोग टिकट मांग रहे हैं।

भाजपा के बड़े नेता बताते हैं कि पार्टी की ओर से नेता पुत्रों और रिश्तेदारों के लिए पहले आवेदन करने से मना किया गया है। लेकिन जो बाहर से आए हैं और जो पार्टी में पुराने कार्यकर्ता हैं, उनमें भी एक-एक सीट पर कई-कई उम्मीदवार अपना दावा प्रस्तुत कर रहे हैं।

पार्टी की ओर से जिताऊ कार्यकर्ता को टिकट देने की उम्मीद ज्यादा बताई जा रही है। फिर भी प्राइवेट एजेंसी से पार्टी ने सर्वे कराया है। संघ के साथ बैठक कर नामों की चर्चा होगी। इसके बाद ही कोई निर्णय होगा। हालांकि समन्वय बैठक में कुछ जिलों की चर्चा हो चुकी है। लेकिन अभी तक पत्ते नहीं खुले हैं। उपचुनाव की तैयारी को लेकर संगठन और सरकार दोनों की ओर से पूरी ताकत झोंक दी गई है। मुख्यमंत्री लगभग हर विधानसभा में अपनी जनसभा कर कुछ न कुछ घोषणा जरूर कर आए हैं।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि भाजपा का उम्मीदवार चयन करने का अलग तरीका है। पैनल के नाम जिले से आते हैं। इसके बाद पैनल संसदीय बोर्ड में जाता है। भाजपा नामांकन के आस-पास ही प्रत्याशी घोषित करती है। बड़ी पार्टी है और कुछ लोग बाहर से भी आ गए हैं। ऐसे में माथापच्ची और दावेदारी लोगों की बढ़ी है। हालांकि उपचुनाव में भाजपा का रिकार्ड ठीक नहीं रहा है। ऐसे में वह कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सर्वे के आधार पर जिताऊ प्रत्याशी को ही टिकट देने का प्रयास करेगी। फिलहाल भाजपा अभी उगता सूरज है। ट्रैक रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2014, 2017, 2019 का रिकार्ड अच्छा रहा है। इसी कारण लोगों की दावेदारी बढ़ी।

श्रीवास्तव ने बताया कि 2014 में जब से अमित शाह प्रभारी बने थे, तभी से जिताऊ उम्मीदवार का चयन किए जाने लगा गया था। उसके बाद से बाहरी और विचार जैसे मुद्दे गौण हो जाते हैं। भाजपा इस बार उपचुनाव की सभी सीटों को जीतने का दावा कर रही है। ऐसे में प्रत्याशी चयन के लिए जो अपना वोट और पार्टी का वोट मिलाकर किसी भी विपक्षी दल से बड़ा वोट खड़ा कर पाता है, उसे ही उम्मीदवार बनाएगी। राजनीति में यह मायने नहीं रखता वह किस पार्टी से है। पार्टी के नेता पहले भी कहा चुके हैं कि विचारधारा के लिए संघ और राजनीति के लिए भाजपा है। अच्छे परिणाम लाने के लिए भाजपा किसी भी जिताऊ व्यक्ति पर दांव खेल सकती है।

भाजपा के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, भाजपा उपचुनाव को लेकर बहुत मजबूत तैयारी कर रही है। प्रत्याशियों का चयन करना शीर्ष नेताओं का काम है। उस पर भी मंथन चल रहा है। जहां-जहां चुनाव होना है, वहां लगातार कार्यकर्ताओं और जनता से संपर्क भी चल रहा है। हम हर सीट पर बड़े अंतर से चुनाव जीतेंगे।

वैसे आम तौर से विधानसभा उपचुनाव को सत्तारूढ़ दल का माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ चुनाव में भाजपा को इसका बड़ा कटु अनुभव रहा है। ऐसे में वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेगी। वहीं, दूसरी ओर लोकसभा परिणाम से निराश हुए सपा, बसपा और कांग्रेस के लिए उपचुनाव निराशा या संजीवनी दे सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा।

ज्ञात हो कि प्रदेश में हमीरपुर सीट पर चुनाव का ऐलान पहले ही हो चुका है। अब 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, इनमें फिरोजाबाद की टूंडला को छोड़कर बाकी सीटों पर चुनाव तिथि घोषित हो गई है। इनमें रामपुर, सहारनपुर की गंगोह, अलीगढ़ की इगलास, लखनऊ कैंट, बाराबंकी की जैदपुर, चित्रकूट की मानिकपुर, बहराइच की बलहा, प्रतापगढ़, हमीरपुर, मऊ की घोसी सीट और अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट शामिल है। इन 12 विधानसभा सीटों में से रामपुर की सीट सपा और जलालपुर की सीट बसपा के पास थी और बाकी सीटों पर भाजपा का कब्जा था।