तिरुवनंतपुरम। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) से खुलासा हुआ है कि पिनराई विजयन नीत वाम मोर्चा सरकार ने राज्य सतर्कता प्रमुख के तौर पर लोकनाथ बेहरा की नियुक्ति के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक विभाग से अनुमति नहीं ली थी।
बेहरा को पिछले वर्ष मार्च में सतर्कता प्रमुख बनाया गया था और वह केरल पुलिस प्रमुख भी हैं।
नियमों के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी को अस्थायी तौर पर भी राज्य सतर्कता प्रमुख बनाया जाता है तो भी, केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक विभाग से मंजूरी लेनी पड़ती है। बेहरा के मामले में इस नियम का पालन नहीं किया गया।
पूर्व गृह राज्य मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने विजयन सरकार की ओर से बेहरा की नियुक्ति की सूचना नहीं देने को एक बड़ी चूक बताया।
विजयन सरकार के चहेते माने जाने वाले बेहरा को मई 2016 में उसी दिन राज्य पुलिस प्रमुख बनाया गया था, जिस दिन विजयन ने अपना पदभार संभाला था। बेहरा से पहले टी.पी. सेनकुमार यह पद संभाल रहे थे।
सेनकुमार ने हालांकि 11 महीने की कानूनी लड़ाई जीत कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के तहत अपना पद हासिल कर लिया था।
इस पद पर बेहरा की सेनकुमार के सेवानिवृत होने के बाद फिर से वापसी हुई। दोबारा नियुक्ति के 55 दिनों बाद पिछले वर्ष मई में सेनकुमार सेवानिवृत हो गए थे।
आरटीआई कार्यकर्ता डी.बी बिनू के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं कर्मिक विभाग से नियुक्ति की अनुमति नहीं लेना स्पष्ट तौर पर सभी नियमों एवं प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन है।
उन्होंने कहा, इस मामले में नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि राज्य सरकार को सतर्कता प्रमुख के पदों पर नियुक्ति के संबंध में केंद्र को सूचित करना होता है और अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
बिनू ने कहा, अब बेहरा ने जितने भी सतर्कता मामलों को देखा है, उन सभी को दोबारा खोला जाना चाहिए।
 

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