लखनऊ: राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का कहना है कि यूपी इंवेस्टर्स समिट में उद्योगपतियों की घोषणाएं जब तक व्यावहारिक रूप से धरातल पर नहीं उतरेंगी, तब तक इन घोषणाओं से यूपी के युवाओं का भला नहीं होने वाला। 

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने कहा कि ऐसी ही कई घोषणाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं के लिए कर चुके हैं, लेकिन वे वास्तविक धरातल पर दिखाई नहीं पड़ीं।

डॉ. अहमद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उप्र को बीमारू राज्य कहने पर एतराज जताया और कहा कि यदि मुख्यमंत्री की नजर में यह राज्य बीमारू है तो उन बीमारियों का इलाज पहले करना चाहिए जो जानकारी में आ गई हों, ना कि समिट कर इलाज के नए तरीके खोजे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राजधानी में बंद पड़ी पेपर मिल, विक्रम कॉटन मिल, आटा मिलों और कानपुर में बंद पड़ी एल्गिन मिल, लाल इमली मिल, टॉट मिल समेत कई जिलों में बंद पड़ी मिलों और चीनी मिलों को चालू कराने की तैयारी करनी चाहिए, ताकि हजारों कर्मचारियों को रोजगार मिल सके और उद्योगों की पुन: स्थापना करके बीमारी को खत्म किया जा सकता है। तमाशा खड़ा करने से विकास नहीं होता।
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार प्रदेश के युवाओं को 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक बार फिर भाजपा के पक्ष में लॉलीपाप दिखाकर आकर्षित करना चाह रही है, लेकिन इस बार ख्वाब अधूरा ही रहेगा। देश के युवा इन लोगों की हकीकत अच्छी तरह समझ चुके हैं।

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