तुर्की सीपीईसी से जुड़ने के लिए तैयार : एर्दोगान

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के दौरे पर आए तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) की परियोजनाओं से जुड़ने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, उन्होंने सीपीईसी को लेकर यह टिप्पणी भी की कि इसे तुर्की के उद्यमियों को ठीक से बताए जाने की जरूरत है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की उपस्थिति में पाकिस्तान-तुर्की व्यापार एवं निवेश फोरम को संबोधित करते हुए एर्दोगान ने यह बात की। उन्होंने सीपीईसी से जुड़ने की तुर्की की इच्छा तो जताई लेकिन इसे लेकर अपने देश की शंकाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुर्की को वही अवसर नहीं दिए गए जो कुछ अन्य देशों को दिए गए हैं।

गौरतलब है कि सीपीईसी परियोजनाओं पर भारत अपनी कड़ी आपत्ति जताता रहा है। उसका कहना है कि यह परियोजनाएं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान के उन क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं जो उसका हिस्सा है। इन विवादित इलाकों में इस तरह की परियोजनाओं की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एर्दोगान ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्की के बीच व्यापार अभी संभावनाओं और क्षमताओं से बहुत कम स्तर पर है।

उन्होंने कहा, जितना बेहतर राजनैतिक संबंध दोनों देशों के बीच है, वैसा ही संबंध आर्थिक क्षेत्र में भी होना चाहिए। आज हमारे बीच केवल 80 करोड़ डॉलर का व्यापार हो रहा है जो हमारे लिए अस्वीकार्य है। इसे अविलंब एक अरब डॉलर करने की जरूरत है तथा इसे बढ़ाकर पांच अरब डॉलर तक ले जाना होगा। और, यह महज सद्भावनाओं से नहीं होगा। इसके लिए हमें मजबूत और स्पष्ट कदम उठाने होंगे।

उन्होंने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंध बढ़ रहा है। परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी तुर्की-पाकिस्तान से सहयोग कर रहे हैं। एर्दोगान ने कहा, मैंने सुना है कि पाकिस्तान के लोग पश्चिमी जगत की स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक भरोसा करते हैं। हमें इस सोच को बदलना होगा। तुर्की के पास पश्चिमी जगत से अधिक आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है।

कला-संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग पर उन्होंने कहा, दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह पाकिस्तान में भी तुर्की के धारावाहिक काफी पसंद किए जाते हैं। ऐसे में हमें एक साथ फिल्मों के निर्माण के क्षेत्र में काम करने के बारे में सोचना चाहिए। इस मौके पर इमरान ने कहा कि एर्दोगान की जो लोकप्रियता पाकिस्तान में है, उसके साथ वह अगर यहां चुनाव लड़ें तो बहुत आसानी से जीत जाएंगे।