नई दिल्ली : एप्पल की भारतीय बाजार में उपस्थिति को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने पिछले हफ्ते स्वीकार किया था कि साल की चौथी तिमाही में उनका भारत में सपाट कारोबार रहा, जिसका मुख्य कारण भारतीय मुद्रा की डॉलर के खिलाफ जारी गिरावट रही। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय मध्य वर्ग में उनका भरोसा है कि वे कंपनी की बिक्री बढ़ाएंगे।

भारतीय उपभोक्ता पैसा वसूल उत्पाद पसंद करते हैं, जहां 45 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन यूजर्स हैं और यह चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन बाजार है, जिसकी वृद्धि दर अगले कुछ सालों में दोहरे अंकों में होने की उम्मीद है।

उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक, कुक को भारतीय बाजार में संभावनाओं को अंदाजा है। वहीं, दूसरी तरफ दुनिया के दूसरे बाजारों में संतृप्तता की स्थिति आ चुकी है, इसलिए कुक भारत पर विशेष जोर दे रहे हैं।

एप्पल जल्द ही भारत में अपना विनिर्माण शुरू करनेवाली है, ताकि फोन की कीमतें उपभोक्ताओं के बजट में रखी जा सके। भारतीय बाजार के प्रीमियम स्मार्टफोन खंड में चीनी कंपनी वनप्लस सबसे आगे है और उसके बाद दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग है, जबकि एप्पल तीसरे नंबर पर है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी प्रीमियम खंड में 25 फीसदी है।

काउंटरप्वाइंट के एसोसिएट निदेशक तरुण पाठक ने आईएएनएस को बताया, साल 2018 में एप्पल ने भारतीय बाजार में पहली बार बिक्री में गिरावट दर्ज की है। हमें उम्मीद है कि इस साल आईफोन की बिक्री कुल 20-25 लाख डिवाइसों की होगी, जबकि पिछले साल कुल 30 लाख आईफोन्स की बिक्री हुई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले शहरों में प्रीमियम फोन के खरीदारों की कमी नहीं है और कुक को यहां के प्रचुर अवसरों के बारे में पता है।

आईडीसी इंडिया के एसोसिएट रिसर्च मैनेजर (क्लाइंट डिवाइसेज) उपासना जोशी ने आईएएनएस से कहा, किसी भी ब्रांड के यह जरूरी है कि देश में ही निर्माण करे, इससे आयात शुल्क में बचत होती है और फोन की बाजार में कीमत कम रखी जा सकती है। यह एप्पल जैसे ब्रांड के लिए ज्यादा जरूरी है, क्योंकि सैमसंग, वीवो और ओप्पो स्थानीय स्तर फोन का निर्माण करती है और उनकी बाजार हिस्सेदारी भी अधिक है।

 

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