अदालत ने शादीशुदा जोड़े और उनकी 4 महीने की बच्ची को मिलाया

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नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक 27 वर्षीय व्यक्ति को उसकी पत्नी और बच्चे के साथ फिर से मिला दिया। लगभग एक साल पहले इस व्यक्ति पर अपनी पत्नी का अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। अंकित कुमार और एक लड़की ने पिछले साल 18 फरवरी को अपनी शादी की घोषणा की, जिसके बाद लड़की के पिता द्वारा आपत्ति जताई गई।

उस समय लड़की के पिता ने दावा किया था कि उसकी बेटी की शादी के समय 18 साल से भी कम उम्र थी और उसका अपहरण किया गया था। इसके बाद 10 मई 2019 को अंकित को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद पत्नी को निर्मला छाया आश्रय गृह में भेजा गया था और तब से वह वहीं पर रह रही थी।

दिल्ली के निवासी अंकित कुमार पर अपहरण व दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया। हालांकि उसे 11 दिसंबर, 2019 को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। इस बीच उसकी पत्नी ने यहां महिला आश्रय गृह में एक बेटी को जन्म दिया।

कुमार ने हाईकोर्ट के समक्ष एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसमें आग्रह किया गया कि उसकी पत्नी और बेटी को अदालत में पेश किया जाए और उन्हें घर ले जाने की अनुमति दी जाए। साथ ही उसने यह भी कहा कि उसने अभी तक अपनी बच्ची को देखा तक नहीं है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और आई. एस. मेहता की खंडपीठ ने बुधवार को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को पांच कार्य दिवसों के अंदर कुमार की याचिका पर फैसला करने के लिए कहा और आश्रय गृह में उचित समय के दौरान उसे उसकी पत्नी व चार महीने की बेटी से मिलने की अनुमति भी दी।