श्रीलंका : कोरोना संबंधी सहायता वितरण के दौरान मची भगदड़ में 3 महिलाओं की मौत

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कोलंबो : श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में कोरोनोवायरस संबंधी सहायता वितरण के दौरान मची भगदड़ में कम से कम तीन महिलाओं की मौत हो गई जबकि नौ अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि यह घटना गुरुवार को कोलंबो के मालिगावाट्टा इलाके में घटी, जहां एक व्यवसायी ने गरीबों को 1,500 श्रीलंकाई रुपये ( 8 डॉलर ) के नकद दान वितरित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया था।

देश भर में लॉकडाउन लगा हुआ है जिसने अर्थव्यवस्था को बिना पर्यटन के कगार पर धकेल दिया है, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है।

पुलिस अधीक्षक जलिया सेनारत्ने ने कहा कि इस घटना के बाद चैरिटी कार्यक्रम आयोजित करने वाले छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सेनारत्ने ने पत्रकारों से कहा, सब कुछ पांच या 10 मिनट के भीतर हुआ। सहायता पाने के लिए 1,000 से अधिक लोग इकट्ठा हुए थे। तीन की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए।

पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। सेनारत्ने ने कहा कि व्यवसायी और उसके पांच सहयोगियों ने पवित्र मुस्लिम महीने रमजान की समाप्ति से पहले अंतिम जुमे की पूर्व संध्या पर एक मस्जिद के पास कार्यक्रम का आयोजन किया था।

एक पुलिस अधिकारी ने एफे को बताया, लोग मस्जिद के पास एक सड़क पर इकट्ठा हुए थे, जहां उन्हें नकद चंदा दिया जा रहा था। हमें बताया गया प्रत्येक को 1500 रुपये दिए गए।

आरोपी पर पुलिस को सूचित किए बिना एक सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन करके सामाजिक दूरी नियमों का ऐसे समय में उल्लंघन करने का आरोप है, जब सरकार ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए भीड़ के एकत्र होने को प्रतिबंधित किया है।

सेनारत्ने ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर भगदड़ होने से संबंधित आरोप भी हैं। चैरिटी कार्यक्रम का आयोजन उन लोगों की मदद करने के लिए किया गया था, जो सप्ताहभर के कर्फ्यू से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।

पिछले सप्ताह प्रतिबंधों में छूट दी गई थी क्योंकि देश में अभी तक केवल 1,000 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए और नौ मौतें हुई हैं।

गरीबी लोगों की सहायता के लिए, सरकार ने मार्च से प्रत्येक परिवार को 5,000 श्रीलंकाई रुपये का मासिक अनुदान वितरित करने की योजना शुरू की थी।

हालांकि, सरकार ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग के अनुरोध के बाद कार्यक्रम को बंद कर दिया, क्योंकि इसे आगामी संसदीय चुनावों से पहले आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है। चुनाव निकाय ने 25 अप्रैल को चुनाव तय किया था, लेकिन महामारी के कारण अब चुनाव 20 जून को होंगे।