मप्र में निजी निवेश आकर्षित करने को उठाएंगे कदम : शिवराज

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार अपनी औद्योगिक नीति की समीक्षा करेगी। खासतौर से अन्य राज्यों द्वारा इस संदर्भ में अति महत्वाकांक्षी रणनीति तैयार किए जाने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि राज्य सरकार छोटे और मझोले उद्योगों के नेटवर्क को फैलाने व युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है और वह मानते हैं कि दक्षिणी राज्यों या गुजरात या पंजाब जैसे अपने समकक्षों की तरह ही यह प्रदेश भी उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है।
अपनी तीसरी पारी की समाप्ति से एक साल पहले शिवराज विधानसभा चुनाव में अपनी जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं। उन्होंने वर्ष 2019 में होने वाले अगले वैश्विक निवेशकों के सम्मेलन से पहले नीतियों की समीक्षा की बात कही है।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कृषि उत्पादों के मूल्य में गिरावट के कारण कुछ किसान आंदोलनरत हैं और उनकी सरकार इस मामले को देख रही है।
शिवराज ने कहा कि राज्य सरकार ने यह महसूस किया है कि सिर्फ कृषि विकास को बनाए रखने से काम नहीं चल सकता। इसलिए साल 2007 में निवेश को आकर्षित करने के लिए वैश्विक निवेशकों के सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत नीतियों में बदलाव किया जा रहा है और सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम विकसित किया जा रहा है, कारोबार में आसानी के लिए सुधार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, वित्तवर्ष 2014-15 के दौरान हमने 2.73 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया, जबकि कुल 5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। वहीं, इंदौर में हुए पिछले निवेश सम्मेलन में करीब 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुझे उम्मीद है कि इनमें से वास्तविक निवेश का आंकड़ा 2.5 करोड़ के आसपास का होगा। सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, वाहन, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन और अन्य क्षेत्रों में निवेश के प्रस्ताव मिले हैं।
58 वर्षीय मुख्यमंत्री ने कहा, अगर बाहर से निवेशक आते हैं तो उनका स्वागत है, नहीं तो हम अपने लोगों को उद्यमी और उद्योगपति के रूप में विकसित करेंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य ने मध्यप्रदेश युवा उद्यमी योजना शुरू किया है, जिसके अंतर्गत छोटे और मध्यम उद्यम के लिए 2 करोड़ रुपये तक का ऋण मुहैया कराया जाएगा।
उन्होंने कहा, इन ऋणों की गारंटी सरकार देगी। इसके नतीजे मिलने शुरू भी हो गए हैं। गरीब पृष्ठभूमि के कई युवाओं ने अपने आपको एक सफल उद्यमी और उद्योगपति के रूप में विकसित किया है।
शिवराज ने कहा कि बिजली, सड़क, पानी को ध्यान में रखते हुए हमारा जोर अवसंरचना विकसित करने पर है। उन्होंने कहा, कुछ साल पहले हम 2,900 मेगावाट बिजली पैदा कर रहे थे। आज हम 17,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। अब हम जरूरत से अधिक बिजली पैदा कर रहे हैं और अन्य राज्यों को भी आपूर्ति की जा रही है।
खेती के बारे में उन्होंने कहा कि जब वह सत्ता में आए थे तो कुल सिंचित भूमि 7.5 लाख हेक्टेयर थी। उन्होंने कहा, हम हर साल 4.5 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचित बना रहे हैं और मेरा लक्ष्य 60 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि बनाना है।
किसान आंदोलन और जून में मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी में पांच और लाठीचार्ज में एक किसान की मौत पर शिवराज ने कहा, मंदसौर का आंदोलन, किसान आंदोलन नहीं था।
उन्होंने कहा, मंदसौर मध्यप्रदेश का सबसे अमीर जिला है, क्योंकि वहां अफीम उगाया जाता है। इसके पीछे कई असामाजिक तत्व थे, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया है। उनकी गतिविधियां हमेशा संदेहजनक थी। हमारे खिलाफ कुछ तस्कर थे, क्योंकि हमने कार्रवाई की थी और कुछ को एनएसए ने गिरफ्तार किया था।
चालीस से ज्यादा किसानों की आत्महत्या के बारे में उन्होंने कहा, मैं इसे उचित नहीं बता रहा, लेकिन यह स्थिति देश के हर हिस्से में है। जो लोग खेती करते हैं, अगर वे किसी वजह से आत्महत्या करते हैं, तो उसे किसान आत्महत्या कहा जाता है, जबकि आत्महत्या की वजह दूसरी होती है। हमें समस्याओं को समझना होगा, फिर समाधान ढूंढना होगा।
उन्होंने कहा कि साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है और इसे प्रधानमंत्री को सौंप दिया गया है।