नई दिल्ली : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि राजनीतिक संपर्क के बगैर कोई निर्वाचन आयुक्त नहीं बनता।

यादव से यहां एनडीटीवी यूथ कॉन्क्लेव में पूछा गया कि क्या वह निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा करते हैं? उन्होंने कहा, बगैर राजनीतिक पहुंच के लोग वहां (निर्वाचन आयोग) नियुक्त नहीं हो पाते। चूंकि मैं भी एक मुख्यमंत्री रहा हूं, इसलिए इसे जानता हूं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, प्रस्तावित नामों की एक सूची (नियुक्ति करने वाले प्राधिकार के पास) आती है। अंततोगत्वा उन्हें (नियुक्ति पाने वाले) एक राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए पास किया जाता है। हम बाहर से कह सकते हैं कि आयोग निष्पक्ष है, लेकिन यह एक राजनीतिक बंदोबस्त के जरिए पास होता है।

यादव ने कहा कि मई में उत्तर प्रदेश के कैराना और नूरपुर उपचुनाव के मतदान के लिए 24 घंटे से भी कम समय शेष रह गए थे, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोस के बागपत में एक रैली आयोजित की, लेकिन निर्वाचन आयोग ने उन्हें नहीं रोका।

उन्होंने कहा कि रैली से पास में स्थित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता था।

यादव ने ईवीएम के बारे में कहा, भरोसा टूटा है और मैंने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था। हम सिर्फ ईसी से अनुरोध कर सकते हैं कि वह राजनीतिक दलों को समझाए कि जिन ईवीएम में गड़बड़ी विकसित होती है, उसे वह कैसे ठीक करता है।

सपा नेता ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए ईवीएम के बदले मत-पत्र के इस्तेमाल की वकालत की।

उन्होंने कहा, यदि मत-पत्र का इस्तेमाल किया जाता है तो लोगों की नाराजगी दूर हो जाएगी और ईवीएम को लेकर पैदा हुआ अविश्वास भी दूर हो जाएगा।

अखिलेश ने यह भी कहा कि देश को आरएसएस से बचाना जरूरी है।

उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दृश्यमान है। लेकिन हमें एक अदृश्य शक्ति से भी लड़ना है। यह आरएसएस है, जिसने विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमीन पर दुष्प्रचार फैलाया। आरएसएस विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच खाई खोदता है।

उन्होंने कहा कि पीएमओ का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है और वह तथा अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियां अगले विधानसभा चुनाव में राज्य में भाजपा की हार सुनिश्चित कराएंगी।

यादव ने कहा, यदि भाजपा को उत्तर प्रदेश में रोक दिया गया, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर रुक जाएगी। यदि कोई भाजपा को रोक सकता है, तो वह क्षेत्रीय ताकतें हैं।

उन्होंने कहा, मैं गठबंधन के लिए तैयार हूं और महागठबंधन के लिए आवश्यकता पड़ने पर दो कदम पीछे हटने में जरा भी संकोच नहीं करूंगा। मैं पीछे नहीं हटूंगा। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के नाते कांग्रेस को गठबंधन के मुद्दे पर एक बड़ा दिल दिखाना होगा।

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