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अंजना दास और सुभाष नारायणन 

नई दिल्ली: सरकार इस साल अपने 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए बिजली क्षेत्र की सरकारी कंपनी पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) को आरईसी लि. में अपनी समूची हिस्सेदारी को 20 फीसदी के प्रीमियम पर खरीदने को कहा है।

वित्त वर्ष 2018-19 खत्म होने में केवल एक महीना बचा है और सरकार ने जिन कंपनियों की पहचान की थी, उनके विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए जोर-शोर से जुटी है। इसके तहत सरकार अगले कुछ हफ्तों में पीएफसी-आरईसी सौदा पूरा करेगी, जिससे सरकार को 16,000 करोड़ रुपये की विनिवेश आय होगी।

इस सौदे के तहत पीएफसी सरकार की आरईसी में समूची 52.85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी, जिसके शेयरों की बीएसई (बम्बई स्टॉक एक्सचेंज) पर कीमत फिलहाल 122 रुपये प्रति शेयर है। सरकार को अपनी हिस्सेदारी बेचने से करीब 12,750 करोड़ रुपये की आय होगी और 20 फीसदी प्रीमियम के साथ सरकार की कुल कमाई 16,000 करोड़ रुपये होगी।

पीएफसी-आरईसी विलय से सरकार को अच्छा-खासा फायदा होगा और वह 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य के और करीब होगी। इसके अलावा, विनिवेश विभाग ब्लू चिप कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी बेचने पर भी विचार कर रहा है, खासतौर से यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के निर्दिष्ट उपक्रम (एसयूयूटीआई) के जरिए। इसके अलावा भारत 22 ईटीएफ फंड ऑफर का दूसरा दौर लेकर आ सकती है और कुछ पीएसयूज (सार्वजनिक निर्गमों) द्वारा बायबैक ऑफर भी लाया जा सकता है।

यह सौदा पिछले वित्त वर्ष में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) द्वारा किए गए हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) के अधिग्रहण के जैसा है, जोकि सरकार के 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य के तहत किया गया। वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार इस लक्ष्य में से केवल 35,533 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है।

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