लुंगलेई (मिजोरम)| मिजोरम के लुंगलेई जिले के त्लाबंग क्षेत्र में दो महीने पहले भीषण वर्षा के कारण आई अचानक बाढ़ से मिले जख्म अभी भरे नहीं हैं। स्थानीय समुदाय हालात को सामान्य बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
‘मोरा’ तूफान ने इसी साल 13 से 15 जून के बीच बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अपना असर दिखाया था। कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में मकान ध्वस्त हो गए थे। मिजोरम पर इसकी मार सबसे बुरी पड़ी थी। इसमें भी विशेषरूप से मिजोरम-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्लाबंग परगना भारी बारिश के बाद अचानक आई इस बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हुआ था।
अब दो महीने बाद मुख्य शहर में हालात पहले से थोड़ा बेहतर हुए हैं लेकिन नदी के किनारे स्थित गांवों में तबाही का मंजर अभी भी देखा जा सकता है।
डेढ़ हजार की आबादी वाले तबालाबाग गांव में तबाही बहुत अधिक हुई और यहां राहत बहुत कम मिली। उन तीन दिनों में अधिकांश घर पानी में डूब गए थे, कुछ बाढ़ को झेलने में सफल रहे लेकिन कई इसमें बह गए।
इनमें से मजदूर स्वाना चकमा जैसे कई लोग हैं जो अपना घर फिर से नहीं बना सके हैं और रिश्तेदार के घर रह रहे हैं।
लोगों को उम्मीद है कि पहली अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समूचे पूर्वोत्तर में बाढ़ के प्रकोप से निपटने के लिए घोषित दो हजार करोड़ रुपये के पैकेज से उन्हें जरूर मदद मिलेगी। इस पैकेज और जून में घोषित तीन सौ करोड़ रुपये के पैकेज का लाभ अभी प्रभावित लोगों तक पहुंचना बाकी है।

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