नई दिल्ली| बैंकिंग सेक्टर में सुधार संबंधी प्रस्तावित सरकारी नीतियों के खिलाफ बैंक कर्मियों की एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल के चलते मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बैंक सेवाएं प्रभावित हैं।
हड़ताल का आह्वान करने वाले नौ बैंक संघों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के एक अधिकारी ने कहा कि देश की 1,30,000 शाखाओं में कार्यरत 10 लाख से भी अधिक बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके कारण चेक क्लीयरिंग का कामकाज प्रभावित हुआ है।
यूएफबीयू बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों और अन्य मुद्दों के खिलाफ विरोध कर रही है।
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संगठन (एआईबीईए) के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने आईएएनएस से कहा, “हड़ताल पूरी तरह सफल है। बैंक अधिकारियों ने बैंकों के विलय व निजीकरण की ओर सरकार के कदम के विरोध में पिछली शाम (सोमवार) को शाखाओं के बाहर प्रदर्शन किए।”
हड़ताल यूएफबीयू और भारतीय बैंक संघ, मुख्य श्रम आयुक्त और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के बीच शुक्रवार को वार्ता असफल होने के बाद हुई है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बीएसई में दर्ज नियामक में कहा, “ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन और ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन यूएफबीयू का हिस्सा होने के नाते हड़ताल में शामिल रहेंगे। हड़ताल के कारण हमारे बैंक के प्रभावित होने की भी संभावना है।”
एआईबीईए ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि 17 सूत्री मांगों में प्रमुख मांग सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को पर्याप्त पूंजी देने से इनकार किए जाने से संबंधित है, जिससे निजीकरण की स्थिति पैदा होगी।
एआईबीईए ने कहा, “बैंकों के निजीकरण का अर्थ है कि हमारे बैंकों में मौजूद आम जनता के 80 लाख करोड़ रुपये का निजीकरण हो जाएगा।”
संगठन ने कहा, “यह देश और जनता के लिए जोखिमभरा है। बैंकों के निजीकरण से कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण नहीं मिल पाएगा।”
बयान के अनुसार, “आज बैंकों की प्रमुख समस्या खराब ऋणों का गंभीर स्तर पर बढ़ना है। यह इस समय करीब 15 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल ऋण का करीब 20 प्रतिशत है। खराब ऋण का काफी बड़ा हिस्सा बड़े औद्योगिक घरानों और कोरपोरेट हाउसों का है।”

मुंबई| बैंकों की देशव्यापी बैंक हड़ताल में महाराष्ट्र के 150,000 से अधिक बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। इससे मुंबई में बैंकिंग कामकाज बाधित हो गया है। बैंक अधिकारी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संग (एआईबीईए) के नेता विश्वास उतागी ने कहा कि हड़ताल से 31 सार्वजनिक बैंकों की 42,000 शाखाएं प्रभावित हुई हैं। इसमें भारतीय स्टेट बैंक और आईडीबीआई बैंक, 18 पुराने बैंक, आठ विदेशी बैंक और 56 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल हैं।
“हड़ताल की वजह से चेक क्लीयरिंग कामकाज, वित्तीय लेनदेन और अन्य दैनिक बैंकिंग कार्यप्रणालियां बाधित हो गई हैं। कई एटीएम, जो कामकाज कर रहे हैं, उनमें दोपहर तक नकदी खत्म हो जाएगी।”
उन्होंने कहा कि इस एकदिवसीय हड़ताल में देशभर की 125,000 बैंक शाखाओं के 10 लाख से अधिक बैंक कर्मचारी शामिल हैं।
शिमला| बैंकिंग क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए देशभर में दिनभर की हड़ताल में समर्थन देते हुए मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी शहरों में बैंककर्मी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके चलते राष्ट्रीयकृत बैंक बंद हैं।
पुलिस ने कहा कि हालांकि हड़ताल शांतिपूर्ण है और कहीं भी यातायात में व्यवधान पैदा करने या हड़ताल के कारण हिंसा की कोई सूचना नहीं है।
संघ नेता प्रेम वर्मा ने शिमला में आईएएनएस से कहा, “पूरे राज्य में बैंक बंद हैं।”
राजधानी शिमला और सोलन जिले में बद्दी बरोतिवाला नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में हड़ताल का ज्यादा असर नजर आया।
सोलन, धर्मशाला, कांगड़ा, पालमपुर, मंडी, रामपुर, कुल्लू, मनाली, उना और हमीरपुर शहरों में भी पूर्ण बंद रहा।
 

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