नई दिल्ली : सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पर बनी संसदीय समिति ने सोमवार को एक बार फिर ट्विटर के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 25 फरवरी को उपस्थित होने का सम्मन भेजा है। उन पर आरोप है कि वे अपने प्लेटफार्म पर राष्ट्रवादी पोस्ट्स के साथ भेदभाव करते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने ट्विटर के सीईओ को सोमवार को उपस्थित होने का सम्मन भेजा था, लेकिन ट्विटर ने अपने अधिकारियों की एक टीम भेजी थी, जिसकी अगुवाई कंपनी की भारत और दक्षिण एशिया नीति निदेशक महिमा कौल ने की।

समिति ने अधिकारियों से मिलने से इनकार कर दिया और वे सम्मेलन कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे।

एक जानकार सूत्र ने आईएएनएस को बताया, समिति के सदस्यों ने इस अवहेलना को बहुत गंभीरता से लिया। उन सदस्यों को सुनने का क्या मतलब था जिनके पास कोई अधिकार नहीं है?

उन्होंने बताया, हम उन्हें उपस्थित होने का दुबारा मौका दे रहे हैं। सीईओ के समिति के समक्ष 25 फरवरी को उपस्थित होने का सम्मन भेज रहे हैं।

सूत्र ने बताया कि समिति ने अपने जांच के दायरे को और व्यापक बनाने पर चर्चा की और वह फेसबुक, वाट्सएप समेत अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग साइटों को भी सम्मन भेजेगी। समिति 26 फरवरी को अन्य सोशल मीडिया के प्रमुखों के कारण बैठक रखने पर विचार कर रही है।

 

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