भुवनेश्वर| ओडिशा में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बंद के आह्वान की वजह से बुधवार को राज्य में कई जगहों पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। बस, ऑटो रिक्शा और अन्य वाहन सड़कों से नदारद हैं। प्रदर्शनकारियों ने नाबालिग लड़की के साथ सुरक्षाकर्मियों द्वारा कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग को लेकर बेंगलुरु-तिनसुखिया सुपरफास्ट एक्सप्रेस, सम्बलपुर-पुरी और सम्बलपुर-रायगड़ा इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन समेत कई ट्रेनों को रोका।
विभिन्न रेलवे और बस स्टेशनों पर यात्री फंसे रहे। दुकानों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बंद रहने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर सड़क बाधित कर दिया।
सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।
नक्सलियों ने भी बंद का समर्थन किया है।
प्रदर्शनकारी इस मामले में सीबीआई जांच और पीड़िता के परिजनों के लिए उचित सहायता राशि की मांग कर रहे हैं।
कोरापुट जिले की सोरिसापदार गांव की पीड़िता ने सोमवार को अपने घर में फांसी के फंदे से लटकर आत्महत्या कर ली थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रसाद हरिचरण ने कहा, “मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, जो कि राज्य के गृह मंत्री भी हैं, को नाबालिग लड़की को न्याय दिलाने में असफल रहने पर नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। दोषियों को भी पकड़ा जाना चाहिए।”
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि राज्य सरकार लड़की की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार है और सीबीआई की जांच से ही मामले के पीछे की सच्चाई का पता चलेगा।
कक्षा नौ में पढ़ने वाली छात्रा के साथ पिछले वर्ष 10 अक्टूबर को कथित रूप से कुछ सुरक्षाकर्मियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने हालांकि इस बात से इनकार किया था कि लड़की से दुष्कर्म किया गया है।
बंद पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ बीजू जनता दल के प्रवक्ता प्रताप देब ने कहा कि विपक्षी पार्टियां मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही हैं।
देब ने कहा, “राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है। लेकिन, विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।”

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