नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल जूट मैन्युफैक्च र्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनजेएमसी) और इसकी सहायक कंपनी बर्डस जूट एंड एक्स्पोर्ट्स लिमिटेड (बीजेएईएल) को बंद करने को मंजूरी प्रदान कर दी।

मंत्रिमंडल की बैठक की जानकारी संवाददाताओं को देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, सरकार ने पिछले 25 सालों में इन दोनों कंपनियों को चलाने की काफी कोशिश की। जो निजी संचालक आए वे भी भाग गए। मंत्रिमंडल ने इन दोनों कंपनियों को बंद करने का फैसला किया है।

कंपनी मुख्य रूप से अनाज के लिए जूट की बोरी बनाती थी। पिछले कई सालों से जूट की बोरी की मांग घटती जा रही है, इसलिए एनजेएमसी को चलाना फायदे का सौदा नहीं रह गया था।

सरकारी बयान के अनुसार, तयशुदा परिसंपत्तियों और चालू परिसंपत्तियों का निष्पादन 14/06/2018 के डीपीई के दिशानिर्देशों के अनुसार होगा और देनदारियों को पूरा करने के बाद परिसंपत्तियों की बिक्री से हुई प्राप्तियां भारत की संचित निधि में जमा कराई जाएंगी।

बयान में कहा गया है कि इस निर्णय से सरकारी कोष को दोनों बीमार सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को चलाने में आ रहे आवर्ती खर्च को कम करने का लाभ मिलेगा। इस प्रस्ताव से घाटे में चलने वाली कम्पनियों को बंद करने में मदद मिलेगी और उपयोगी कार्य के लिए या विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए मूल्यवान परिसंपत्तियों को जारी करना सुनिश्चित होगा।

दोनों सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की जमीन का उपयोग सार्वजनिक/समाज के समग्र विकास के लिए सरकारी कार्य के लिए किया जाएगा।

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