कोरोना को धार्मिक प्रवृतियों से जोड़ना, क्या वायरल संक्रमण से निजात दिलाने में कर रही है मदद…?

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सौम्या ज्योत्सना : शिव के रौद्र रूप से आप सब परिचित होंगे कि किस प्रकार शिव अपने रौद्र रूप में विनाश को आमंत्रण देते हैं। अभी आप सबने अनेकों पौराणिक कहानियां भी देखी हैं, जिसमें उनके रौद्र रूप को दिखाया गया है।  इसके साथ ही काली के रौद्र रूप से भी परिचित होंगे कि काली भी अपने विनाशकारी रूप में विनाशकारी तांडव करती हैं, जिसके बाद उन्हें सौम्य रूप में लाने में हर किसी को मशक्कत करनी पड़ती है।

काली को शांत करना सबके लिए चुनौतीपूर्ण होता है। उस समय शिव भी शव में तब्दील हो जाते हैं और भूमि पर लेट जाते हैं ताकि काली का गुस्सा शांत हो जाए।

सौम्यता से तांडव का रूप

इस तरह से जब काली अपने पार्वती स्वरुप में होती हैं, उस वक्त वे बेहद सौम्य होती हैं मगर अपने प्रचंड रुप में आते ही सबको दंडित करती हैं और स्त्री की शक्ति का भान करवाती हैं कि जिस स्त्री को तुम सब अबला समझने की गलती कर रहे हो, वह अबला नहीं बल्कि सबला है।

इस तरह पौराणिक ग्रंथों में एक स्त्री को शक्ति के रूप में दर्शाया गया है कि एक स्त्री अपने विनाशकारी रूप में कैसी हो सकती है। वह जब तक सहती है, सहती है मगर एक बार शक्ति को धारण कर लेने पर उसकी राह को कोई रोक नहीं सकता है।

त्रासदियों के नाम महिलाओं पर

इसी तरह आपको विभिन्न त्रासदियों के नाम याद होंगे, जिनका नामाकरण एक महिला के रूप में हुआ है। जैसे-   तूफान नीना (1975), तूफान पोउलिन (1997), तूफान कटरीना (2005), चक्रवात नरगिस (2008), तूफान रीता (2005) और चक्रवात निलोफर (2014) आदि।

इन सब त्रासदियों के नाम एक महिला के नाम पर हुए हैं। यह सारे तूफान और चक्रवात बेहद विनाशकारी थे, जिससे आम जीवन को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। प्रकृति के इस विनाशकारी तांडव को प्रकृति की शक्ति के रूप में देखने पर आप पाएंगे कि प्रकृति के पास अनेक शक्ति है। वह अगर रच सकती है, तो विध्वंस भी कर सकती है।

रचयिता के साथ विनाशकारी भी

उसी प्रकार आप एक महिला, एक स्त्री को देखिए। वह भी रच सकती है और विनाश कर सकती है। इन नामकरण से यह बात मुझे साफ लगती है कि इससे महिलाओं की शक्ति को दर्शाया जाता है। उसी प्रकार कोरोना काल है। अभी कोरोना की पूजा हो रही है। लोग उसे मां की उपाधि दे रहे हैं कि कोरोना माई क्रोधित हैं इसलिए वे विनाश की लीला रच रहीं हैं, और लोग पूजा कर रहे हैं।

उन्हें लग रहा है कि कोरोना को अगर मां कहकर संबोधित करेंगे तो वे शांत हो जाएंगी और अपने क्रोध को समेट लेंगी मगर यह केवल लोगों के मन की उपज है। कोरोना एक प्रकार का वायरल संक्रमण है, जो लोगों को अपने चपेट में ले रहा है मगर लोग इसकी भी पूजा कर रहे हैं।

यह एक प्रकार से स्त्री की शक्ति को भी दर्शाता है कि जब किसी प्रकार की आपदा आती है, वह एक स्त्री के गुस्से और रौद्र रूप के कारण होती है। समाज स्वयं ही महिलाओं को शक्ति समझता है और फिर उसका ही अपमान करता है। समाज अगर एक स्त्री को विनाशकारी रूप में देखता है, तब वह हर प्रकार की त्रासदी को एक स्त्री का नाम ही देता है क्योंकि वह स्त्री के क्रोध से परिचित है। भले ही उसके विनाश का तरीका भिन्न होता है।

किसी भी त्रासदी को एक स्त्री का नाम देना उसकी दबी हुई शक्ति को बताता है। वह बताता है कि हर एक महिला को अपने अंदर छिपी शक्ति को पहचानना चाहिए। किसी भी विनाश को स्त्री का नाम देना उसके गुस्से को दर्शाता है कि एक स्त्री का गुस्सा किस हद तक जा सकता है।

यह लेखक अपने विचार हैं।