रांची: झारखंड का 2018-19 का बजट मंगलवार को महज 16 मिनट में बिना किसी चर्चा के पारित हो गया और विधानसभा को निर्धारित समय से एक हफ्ते पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन में जब सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने एक बार फिर से मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डी.के. पांडेय व अतिरिक्त डीजीपी (एडीजीपी) अनुराग गुप्ता को हटाए जाने का मुद्दा उठाया।
दिन का शुरुआती सत्र विपक्ष की मांग को लेकर हंगामे की भेंट चढ़ गया।
दूसरी बार जब सदन दोपहर बाद 2 बजे फिर से शुरू हुआ तो विपक्षी सदस्य फिर से सदन के मध्य में जमा हो गए और अधिकारियों को हटाने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष दिनेश ओरांव ने कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत से इस मुद्दे पर कटौती प्रस्ताव (कट मोशन) लाने को कहा, लेकिन विधायक ने यह कहकर ऐसा करने से इनकार कर दिया कि सदन व्यवस्थित नहीं है।
इस स्थिति में, राज्य सरकार ने सभी विभागों के बजट को एक साथ रखा और उन्हें 16 मिनट में बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। प्रावधानों के अनुसार विधानसभा द्वारा पारित करने से पहले विभागों के बजट पर अलग से चर्चा करनी होती है।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया, हालांकि इसका 7 फरवरी तक अंत होना था।
विधानसभा के 17 जनवरी से शुरू हुए सत्र में सदन में एक भी दिन कामकाज नहीं हुआ क्योंकि विपक्ष तीन शीर्ष अधिकारियों के हटाए जाने की मांग पर अड़ा रहा।
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने चाईबासा कोषागार से धोखाधड़ी से धन निकासी को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उस समय 1990 की शुरुआत में राजबाला पश्चिम सिंहभूम जिले में उप आयुक्त थीं। धन निकासी का यह मामला चारा घोटाले से जुड़ा हुआ है।
डीजीपी पांडेय लातेहार जिले में 2015 में हुई मुठभेड़ को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। आरोप है कि इस मुठभेड़ में नक्सलियों के बहाने निर्दोष लोगों को मार दिया गया था।
एडीजीपी गुप्ता पर विपक्ष ने 2016 के राज्यसभा चुनावों को अनुचित साधनों से प्रभावित करने का आरोप लगाया है।

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