नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि एक परिवार की मौजूदगी को बड़ा बताने के लिए सुभाष चंद्र बोस, बी.आर.अंबेडकर व सरदार पटेल जैसे नेताओं के देश के लिए योगदान को भुला दिया गया।

प्रधानमंत्री ने आजाद हिंद फौज को समर्पित एक संग्रहालय की आधारशिला रखी। मोदी ने कहा कि आजाद हिंद फौज की स्थापना करने वाले सुभाष चंद्र बोस ने कैम्ब्रिज में अपने दिनों को याद करते हुए लिखा था, हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है। इसलिए हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है।

मोदी ने कहा, यह हमारा दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी जिन्होंने देश व हमारी प्रणाली की नींव रखी वो भारत को विदेशी चश्मे से देखते रहे। इससे हमारी विरासत, संस्कृति, शिक्षा प्रणाली, हमारा अध्ययन सभी बुरी तरह से प्रभावित हुआ।

मोदी ने कहा, आज मैं निश्चित तौर पर यह कह सकता हूं कि अगर हमारे देश को सुभाष बाबू, सरदार पटेल जैसे शख्सियतों का मार्गदर्शन मिला होता और अगर भारत को देखने के लिए वो विदेशी चश्मा नहीं होता, तो स्थितियां बहुत भिन्न होतीं। यह दुखद है कि सिर्फ एक परिवार की मौजूदगी को बढ़ाने के लिए पटेल, अंबेडकर व बोस जैसे भारत के सपूतों को भुला दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इसे बदल रही है।

उन्होंने कहा कि देश का संपूर्ण विकास बोस के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पहलू था और राजग सरकार बोस की कल्पना के दिशा में जा रही है।

मोदी लाल किले की प्राचीर से बोल रहे थे। उन्होंने आजाद हिंद सरकार के स्थापना की 75 साल पूरे होने पर ध्वाजारोहण किया।

आजाद हिंद सरकार की स्थापना बोस द्वारा आजादी के आंदोलन के दौरान की थी।

पारंपरिक रूप से प्रधानमंत्री राष्ट्र ध्वज स्वतंत्रता दिवस पर फहराते हैं लेकिन अब मोदी 21 अक्टूबर को लाल किले पर झंडारोहण करने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।

 

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