नई दिल्ली| हरियाणा में दुष्कर्म की घटनाओं पर खट्टर सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने राज्य को ‘रेप स्टेट ऑफ इंडिया’ करार दिया। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाए आरोप-प्रत्यारोप में लगे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनकी सरकार का रवैया आश्चर्यजनक है। कांग्रेस प्रवक्ता सुष्मिता देव ने यहां संवाददाताओं से कहा, “रोजाना अखबारों और टीवी को खोलकर देखना हैरान कर देने वाला है। ऐसा लगता है कि हरियाणा ‘रेप कैपिटल’, ‘रेप स्टेट ऑफ इंडिया’ बन चुका है।”
उन्होंने कहा, “सबसे भयावह हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर जी का रवैया है जो स्पष्ट रूप से महिलाओं के खिलाफ इस तरह के घिनौने अपराधों को रोकने और दुष्कर्म के अपराधियों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक बयान देने और आरोप प्रत्यारोप पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”
हाल ही में हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ कई मामले देखे गए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही दो नाबालिग दलित लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला चर्चा में रहा था।
पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा समेत राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राज्यपाल से भी मिला था और एक बार मुआवजे के बजाए हरियाणा सरकार द्वारा पीड़ित के परिवार में से एक को स्थायी सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की थी।
देव ने पूछा, “हम कुरक्षेत्र में उस बहुत ही गरीब परिवार से मिले..हमारी मुलाकात नाबालिग लड़की के माता-पिता से हुई, लड़की को अगवा कर उसके साथ बेरहमी से दुष्कर्म किया गया और मरने के लिए छोड़ दिया। वह पढ़ने में बहुत तेज थी और उसने अपने स्कूल में 95 फीसदी अंक हासिल किए थे। उसके परिजनों का सपना था कि वह एक पेशेवर बन कर परिवार को मजबूती देगी। आज अगर एक लड़की जिसकी उम्र 15 साल है, उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी जाती है तो क्या परिजन महज एकमुश्त मुआवजे के अधिकारी हैं जो सिर्फ चार लाख रुपये है?”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में इस मुद्दे को उठाने की मांग की।
संवाददाता सम्मेलन में मौजूद पार्टी की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने खट्टर से इस्तीफे की मांग की।
शैलजा ने कहा, “हम नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री का इस्तीफा चाहते हैं..यह पूरी तरह से अक्षम सरकार है। निरंतर अंतराल पर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, इसके बावजूद मुख्यमंत्री खुद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। उन्हंे बरखास्त किया जाना चाहिए और राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।”
शैलजा ने राज्य के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान को पूरी तरीके से विफल करार दिया।

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