चंडीगढ़। पंजाब सरकार पर गंभीर वित्तीय दबाव को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को सुझाव दिया कि मंत्री और विधायक समेत राज्य के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना अपना आयकर स्वंय अदा करना चाहिए।
वर्तमान में मंत्रियों और विधायकों का आयकर सरकार द्वारा अदा किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने खुद को शामिल करते हुए सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से आयकर का खुद भुगतान करने वाले प्रस्ताव को रखते हुए कहा, यह कर बहुत जरूरी कामों के कोष से निकाले जाते रहे हैं।
पंजाब विधानसभा में 117 विधायक हैं।
अमरिंदन ने कहा, पंजाब शायद देश में अकेला राज्य है जो इस प्रणाली का पालन करता है जिसमें सरकार अपने मंत्रियों और विधायकों का कर अदा करती है।
पंजाब सरकार की ओर से निर्वाचित विधायकों का अदा किया जाने वाले आयकर करीब 11.08 करोड़ रुपये सालाना है।
राजकोषीय प्रबंधन पर कैबिनेट उप-समिति की एक बैठक के बाद, एक आधिकारिक प्रवक्ता ने खुलासा किया, इस आयकर में से विधायकों का 10.72 करोड़ रुपये का आयकर चुकाया जाता है, बाकी का बचा मंत्रियों का होता है। बैठक में मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को रखा था।
अमरिंदर ने कहा कि इस सुझाव को अगर लागू किया जाता है तो यह पूरी रकम बचाई जा सकती है, जिसे राज्य के दूसरे महत्वपूर्ण विकास कार्यो और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। कई योजनाएं निधि के कारण लटकी पड़ी हैं।
राज्य सरकार के राजस्व को बढ़ाने के मकसद से मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी सहयोगियों और अमीर किसानों से अपील की है कि वह मुफ्त बिजली सब्सिडी को छोड़ दें।
अमरिंदर ने पिछले साल जून में विधानसभा सत्र के दौरान पहली बार यह अपील की थी। उन्होंने अपनी सब्सिडी का त्याग कर एक उदाहरण पेश किया था।
 

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